यमन संघर्ष में क्यों भड़की नई आग और अदन एयरपोर्ट पर हमलों के पीछे की असली वजह

यमन संघर्ष में क्यों भड़की नई आग और अदन एयरपोर्ट पर हमलों के पीछे की असली वजह

यमन का आसमान एक बार फिर बारूद के धुएं से काला पड़ गया है। जब हूती विद्रोहियों ने अदन इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अपने मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया, तो साफ हो गया कि मध्य पूर्व का यह संकट थमने वाला नहीं है। रनवे के पास मिसाइलें गिरने से तबाही का खतरा मंडराया और काहिरा से आने वाली फ्लाइट को तुरंत जेद्दा की तरफ डायवर्ट करना पड़ा। हवाई अड्डों पर इस तरह के हमले किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और आवाजाही के लिए सीधा आघात होते हैं।

हूती विद्रोहियों की यह बौखलाहट अचानक नहीं फूटी है। इसके पीछे हाल ही में शुरू हुआ 'डॉन ऑफ यमन' सैन्य अभियान है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार और सऊदी समर्थित गठबंधन सेना ने इस ऑपरेशन के तहत ताबड़तोड़ कदम उठाए हैं। ताइज़ के रणनीतिक जबल हबाशी जिले की सबसे ऊंची पहाड़ी पर सरकारी बलों ने दोबारा तिरंगा फहरा दिया है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और मोचा शहर के तटीय इलाकों से जब हूतियों को खदेड़ा गया, तो उनके रणनीतिक गणित बिगड़ गए। अपनी छीनी हुई जमीनों और खोते हुए रसूख से परेशान होकर विद्रोहियों ने नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले तेज कर दिए हैं।

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने खुलेआम दावा किया है कि उन्होंने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, अबहा एयरपोर्ट और खमिस मुशैत स्थित सैन्य एयरबेस को निशाना बनाया है। हालांकि, सऊदी गठबंधन ने भी अपनी रक्षात्मक ताकत का परिचय देते हुए समय रहते कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नेस्तनाबूद कर दिया। सना से लॉन्च किए गए मिसाइल प्लेटफॉर्म्स को ट्रैक करके उन्हें तबाह करना यह बताता है कि इस संघर्ष में एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका कितनी अहम हो चुकी है।

💡 You might also like: this post

इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यमन का संकट अब क्षेत्रीय सीमाओं को लांघकर पूरे खाड़ी देशों को अपनी चपेट में ले चुका है? हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब के अंदरूनी शहरों और संवेदनशील ठिकानों पर हमले की कोशिश कर रहे हैं। जब तक जमीन पर रणनीतिक बढ़त हासिल करने की यह जंग जारी रहेगी, तब तक अदन जैसे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और वहां आने वाले आम यात्री मोहरे बनते रहेंगे।

इस तबाही के चक्रव्यूह से बाहर निकलने का रास्ता केवल सैन्य कार्रवाई नहीं हो सकता। जब तक कूटनीतिक और राजनीतिक समाधान की जमीन तैयार नहीं होती, तब तक हर नया सैन्य अभियान एक नई हिंसा को जन्म देता रहेगा। नागरिकों की सुरक्षा ताक पर है और आने वाले दिनों में यह संघर्ष कौन सा नया मोड़ लेगा, यह देखना बाकी है।

AB

Akira Bennett

A former academic turned journalist, Akira Bennett brings rigorous analytical thinking to every piece, ensuring depth and accuracy in every word.