यमन के ताइज़ में हूती विद्रोहियों का खूनी हमला और बेकसूरों की मौत

यमन के ताइज़ में हूती विद्रोहियों का खूनी हमला और बेकसूरों की मौत

यमन की जलती हुई ज़मीन एक बार फिर मासूमों के खून से लाल हो चुकी है। ताइज़ प्रांत में हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर ऐसा हमला किया, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। इस क्रूर गोलाबारी में पाँच बेकसूर नागरिकों ने अपनी जान गंवा दी। जंग के मैदान में फौजों की लड़ाई तो समझ आती है, लेकिन जब पांच साल की मासूम बच्चियों को निशाना बनाया जाए, तो इसे सिर्फ बर्बरता कहा जा सकता है।

तािज़ प्रांत के मानवाधिकार कार्यालय ने इस वीभत्स घटना की पुष्टि की है। सरकारी चैनलों से मिली रिपोर्ट बताती है कि हूती विद्रोहियों की अंधाधुंध गोलाबारी का शिकार आम लोग बने। इस हमले में मरने वालों में एक पाँच साल की बच्ची भी शामिल है। सोचिए उस परिवार पर क्या गुजर रही होगी। कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टर उनकी जान बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

यमन संघर्ष की भयानक हकीकत

यमन पिछले कई सालों से एक भीषण गृहयुद्ध और सत्ता संघर्ष की आग में झुलस रहा है। यहाँ की लड़ाई सिर्फ राजनीतिक वर्चस्व की नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों के अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है। एक तरफ हूती विद्रोही सरकारी नियंत्रण वाले इलाकों पर लगातार रॉकेट और गोले बरसा रहे हैं, तो दूसरी तरफ यमनी सेना और गठबंधन ताकतें हूतियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक्स कर रही हैं।

इस बीच पिस कौन रहा है? सिर्फ और सिर्फ आम नागरिक। वे लोग जिनका राजनीति या बंदूकों से कोई लेना-देना नहीं है। वे रोजाना अपनी रोजी-रोटी की तलाश में निकलते हैं, और शाम को उनके घरों में सिर्फ लाशें पहुँचती हैं।

मानवीय संकट और दुनिया की खामोशी

तािज़ की यह घटना कोई इकलौती मिसाल नहीं है। यमन दुनिया के सबसे बदतर मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है। खाने के लाले हैं, दवाइयाँ मिल नहीं रहीं, और ऊपर से सिर पर मंडराते बमों के साये। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस खूनी खेल को बस तमाशबीन बनकर देख रहा है। बयानों की औपचारिकताएं बहुत हो चुकीं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर खूनखराबा रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

जब तक कूटनीतिक दबाव नहीं बनेगा और बंदूकें खामोश नहीं होंगी, तब तक ताइज़ जैसी जगहों पर ऐसी खबरें रोज आती रहेंगी। मासूमों की चिताएं जलती रहेंगी और सियासत अपनी रोटियां सेकती रहेगी। अब वक्त आ गया है कि इस चुप्पी को तोड़ा जाए और बेकसूरों की सुरक्षा के लिए दुनिया को आगे आना होगा।

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Akira Bennett

A former academic turned journalist, Akira Bennett brings rigorous analytical thinking to every piece, ensuring depth and accuracy in every word.