रूस की राजधानी अब सुरक्षित नहीं है। यूक्रेन ने मॉस्को पर अपना अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला करके इस बात को साफ कर दिया है। मॉस्को के कपोत्न्या इलाके में स्थित मुख्य तेल रिफाइनरी पर हुए इस हमले ने रूसी सुरक्षा दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। आसमान में उठता काला धुआं सिर्फ एक रिफाइनरी के जलने का संकेत नहीं है, बल्कि यह युद्ध के रूस के घर तक पहुंचने का सीधा सबूत है।
यूक्रेन ने करीब 194 ड्रोन्स के साथ मॉस्को की हवाई सुरक्षा को पूरी तरह थका दिया। इस हमले का मुख्य निशाना बनी गज़प्रॉम नेफ्ट की मॉस्को तेल रिफाइनरी, जो पूरे मॉस्को क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाती है। यह प्लांट अकेले इस पूरे इलाके की 40 प्रतिशत पेट्रोल और 50 प्रतिशत डीजल की जरूरत को पूरा करता है। एक ही हफ्ते में इस प्लांट पर यह दूसरा हमला है, जिसने यहां के क्रूड ऑयल प्रोसेसिंग यूनिट और स्टोरेज टैंकों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
एयर डिफेंस क्यों फेल हुआ
कहा जाता है कि मॉस्को दुनिया के सबसे सुरक्षित और सघन हवाई सुरक्षा घेरे में रहता है। इसके बावजूद यूक्रेन के ड्रोन इतनी दूर तक कैसे पहुंच गए? असल में, यूक्रेन ने इस बार अपनी रणनीति बदल दी है।
- संख्या का खेल: यूक्रेन ने एक साथ इतनी बड़ी संख्या में ड्रोन्स दागे कि रूस के पैंट्सिर और एस-400 जैसे सिस्टम्स हर एक टारगेट को ट्रैक नहीं कर पाए।
- हाइब्रिड तकनीक: इस हमले में पारंपरिक प्रोपेलर ड्रोन्स के साथ 'बर्स' नामक हाइब्रिड ड्रोन-क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इनकी रफ्तार और सटीक निशाना लगाने की क्षमता बहुत ज्यादा है।
- रिहायशी इलाकों का डर: मॉस्को जैसे घने बसे शहर में एंटी-मिसाइल दागने से मलबे गिरने का खतरा बढ़ जाता है। वीडियो में रूसी सैनिकों को रिफाइनरी के ठीक ऊपर कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली मैनपैड्स (MANPADS) मिसाइल से आखिरी सेकंड में ड्रोन गिराने की कोशिश करते देखा गया, जो उनकी बेबसी को दिखाता है।
रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उन्होंने 555 से ज्यादा यूक्रेनी ड्रोन्स को देश भर में मार गिराया। लेकिन सच यह है कि जो कुछ ड्रोन्स बच निकले, उन्होंने मॉस्को के दिल पर चोट की है।
रूस के आम नागरिकों और अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा
यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर यूक्रेन जलेगा, तो मॉस्को भी जलेगा। यूक्रेन का सीधा मकसद इस युद्ध की आंच को उन आम रूसी नागरिकों तक पहुंचाना है जो अब तक इस जंग से खुद को दूर समझ रहे थे।
इस हमले के तुरंत बाद मॉस्को के चार प्रमुख हवाई अड्डों—व्नुकोवो, शेरेमेतिएवो, झुकोवस्की और डोमोडेडोवो—से उड़ानों को रोकना पड़ा। 170 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं। मॉस्को के रिंग रोड पर ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। इसके अलावा, रिफाइनरी के आसपास के इलाकों जैसे बालाशीखा में 'काला तेल का पानी' बरसने की खबरें आईं, जिससे लोग खौफ में हैं।
सबसे बड़ी चिंता तेल की किल्लत को लेकर है। रूस दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक है, लेकिन बार-बार रिफाइनरियों पर हो रहे इन हमलों की वजह से उसे इस महीने समंदर के रास्ते ईंधन आयात करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। राजधानी में डीजल और पेट्रोल की सप्लाई लाइन टूटने से आने वाले दिनों में महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस हमले को 'आतंकवादी कार्रवाई' बताते हुए यूक्रेन पर बड़े जवाबी हमलों की धमकी दी है। लेकिन हकीकत यह है कि युद्ध अब पूरी तरह बदल चुका है। यूक्रेन अब सिर्फ अपनी रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि रूस के आर्थिक और सैन्य बुनियादी ढांचे को सीधे तबाह करने की क्षमता रखता है।
आने वाले दिनों में नजर इस बात पर रखनी होगी कि रूस अपनी रिफाइनरियों को बचाने के लिए फ्रंटलाइन से अपनी हवाई सुरक्षा प्रणालियों को पीछे हटाता है या नहीं। अगर वह ऐसा करता है, तो फ्रंटलाइन पर यूक्रेन को बढ़त मिल सकती है।